Card image cap
05
May

पुस्तक लोकार्पण समारोह*अनकही', 'आसपास', 'सदगुरु कबीर और मानवता' पुस्तकें हुई लोकार्पित* *किताबें हमें विचारशील बनाती हैं–संतोष चौबे*

दिमाग को क्रियाशील बनाए रखने के लिए किताबें पढ़ना बहुत आवश्यक है। वर्तमान समय में बाजार ने टेक्नोलॉजी के माध्यम से हमारी एकाग्रता को पूरी तरह से भंग कर हमारे दिमाग को गुलाम बना लिया है। अब बाजार अपने तरीकों से हमें संचालित कर रहा है। आज हम एक बड़े ग्लोबल बाजार से घिरे हुए हैं। ऐसे में हमारे जीवन में किताबों का महत्व और अधिक हो जाता है। किताबें हमें गुलामी के विरुद्ध खड़े होने की समझ और संबल प्रदान करती हैं। हमें विचारशील बनाती हैं। हमारे संस्थान में आईटी का मतलब लोगों को इम्पावर करना हैं, जबकि बाजार में आईटी का मतलब लोगों को नियंत्रित करना है। टेक्नोलॉजी के पुरोधा एलन मस्क और बिल गेट्स ने भी अपने–अपने साक्षात्कारों में इस बात को रेखांकित किया है कि वे तमाम व्यस्तताओं के बावजूद माह में तीन–चार किताबें जरूर पढ़ते हैं।'
पुस्तकों के महत्व पर यह महत्वपूर्ण उद्गार श्री संतोष चौबे, वरिष्ठ कवि-कथाकार, निदेशक, विश्व रंग एवं कुलाधिपति, रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल द्वारा *श्री नरेश बाथम के ग़ज़ल संग्रह 'अनकही', श्रीमती मनोरमा पंत के लघुकथा संग्रह 'आसपास', एवं डॉ. मालती बसंत की शोध पुस्तक 'सदगुरु कबीर और मानवता' के लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में व्यक्त किए।आईसेक्ट पब्लिकेशन, वनमाली सृजन पीठ एवं स्कोप ग्लोबल स्किल्स विश्वविद्यालय, भोपाल का यह प्रतिष्ठा आयोजन 'शारदा सभागार' स्कोप कैम्पस, स्कोप ग्लोबल स्किल्स विश्वविद्यालय, भोपाल में समारोह पूर्वक किया गया।
श्री संतोष चौबे ने लोकार्पित पुस्तकों में सर्वप्रथम रचनाकार श्री नरेश बाथम के ग़ज़ल, नज़्म, गीत संग्रह 'अनकही' पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि नरेश बाथम ने बहुत अच्छी ग़ज़लें लिखीं हैं। भोपाल ग़ज़लों का शहर हैं। भोपाल ने कई बड़े शायर दिये हैं, जिनका देश–विदेश में बड़ा नाम है। उन्होंने नरेश बाथम की छोटी बहर की ग़ज़ल का उम्दा पाठ भी किया–खत पुराने पढ़ा करोनये तराने गढ़ा करो
पर कटाए बैठे होज्यादा मत उड़ा करो
छूट जाओगे पीछे देखोहर जगह मत अड़ा करो
इस दुनिया में दर्द बहुत हैअपने दिल को कड़ा करो
चाहत है जो तुम्हें छाँव कीपैर बड़ों के पड़ा करो
श्री संतोष चौबे ने मनोरमा पंत के लघुकथा संग्रह 'आसपास' पर अपने विचार रखते हुए कहा कि लघुकथा कविता के ज्यादा निकट होती है। वे संवेदात्मक काम करती हैं। लघुकथा का वितान जब बड़ा होता है तो वे कहानी के करीब होती हैं। मनोरमा जी अपने लेखन के माध्यम से नई चीजों की तलाश करतीं हैं। वे अपनी लघुकथाओं में अनुभूति का अन्वेषण करती दिखाई पड़ती हैं।उन्होंने मनोरमा पंत जी की लघुकथा 'पिघलते सपनें' का बहुत ही भावनात्मक पाठ भी किया।
श्री संतोष चौबे ने डॉ. मालती बसंत की शोध पुस्तक 'सद्गुरु कबीर और मानवता' पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पुस्तक हमें पुर्नविचार की और ले जाती हैं। उन्होंने आगे कहा कि भारत में आधुनिकता की पड़ताल भारत के आधुनिक चिंतकों के साथ ही होना चाहिए। कबीर इस श्रृंखला के महान विचारक-चिंतक रहे हैं। वर्तमान समय में उनके 'ढाई आखर प्रेम' के संदेश को संपूर्ण विश्व को आत्मसात करने की बहुत जरूरत है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री मुकेश वर्मा, प्रतिष्ठित कथाकार एवं अध्यक्ष, वनमली सृजन पीठ, भोपाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि आईसेक्ट पब्लिकेशन ने बहुत कम समय में प्रकाशन जगत में नये कीर्तिमान स्थापित किये हैं। साहित्य की समस्त विधाओं के साथ–साथ विभिन्न विषयों पर उल्लेखनीय पुस्तकों का उत्कृष्ट प्रकाशन किया गया है। आपने विशेषकर युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आपको ज्यादा से ज्यादा किताबें पढ़ना चाहिए।
इस अवसर पर लेखक श्री नरेश बाथम ने अपनी पुस्तक 'अनकही' पर अपने विचार रखते हुए कहा कि इसमें सम्मिलित रचनाओं में मेरे जीवन का सार है। जीवन के विभिन्न पहलुओं को मैंने ग़ज़ल, नज़्म और गीतों के जरिये बयां करने की कोशिश की है। उन्होंने इस अवसर पर अपनी चुनिंदा ग़ज़लों का बेहतरीन पाठ भी किया।
वरिष्ठ साहित्यकार श्री घनश्याम मैथिल 'अमृत' द्वारा अनकही पुस्तक पर अपने समीक्षात्मक उद्बोधन में कहा कि ग़ज़ल दिमाग से नहीं लिखी जाती वह तो दिल से कही जाती हैं। इस तरह दिल से कही गई मुकम्मल और नायाब ग़ज़लों का एक खूबसूरत तोहफा है 'अनकही'। इन ग़ज़लों में भाव की गहरी संवेदना है, ग़ज़ल का खूबसूरत शिल्प विधान है, इन ग़ज़लों के शेर में जिंदगी के कितने ही रंग बिखरे पड़े हैं। इनमें प्यार– मोहब्बत, इज़हार–इंकार, मनुहार–तक़रार, उम्मीद–निराशा, मिलन–विछोह सबकुछ मौजूद हैं।

Related News